ट्रेन की वो यादगार रात

ट्रेन की वो यादगार रात

Kamukta, antarvasna मुझे फ्लाइट से बेंगलुरु जाना था लेकिन किसी कारणवश मुझे ट्रेन से जाना पड़ा। मुझे ट्रेन के थर्ड एसी में सिटी मिल चुकी थी और थर्ड एसी के लिए भी बडी मेहनत करनी पड़ी लेकिन आखिरकार ट्रेन में टिकट मिली चुकी थी। मैं जब ट्रेन की सीट में बैठी तो कुछ देर मैंने एक लंबी गहरी सांस ली जिसके बाद मैं आराम से बैठी रही। मुझे काफी अच्छा लग रहा था क्योंकि मैं ही जानती हूं कि किस प्रकार से मुझे थर्ड एसी में टिकट मिल पाई थी। मेरे बगल की सीट में एक परिवार बैठा हुआ था वह लोग आपस में बात कर रहे थे लेकिन तभी एक नौजवान युवक आया।

ट्रेन कुछ देर पहले ही स्टेशन पर आई थी ट्रेन चलने वाली थी। उसने मुझसे पूछा क्या यह 34 नंबर सीट है? मैंने पीछे घुम कर देखा तो उसे कहा नहीं यह 34 नंबर नहीं है आपकी सीट बिल्कुल मेरे सामने है। उस युवक की सीट बिल्कुल मेरे सामने थी उसकी उम्र मेरी उम्र के जितना ही रही होगी। मुझे लगा चलो कोई तो जवान मेरे सामने बैठा नहीं तो मेरे पड़ोस में सारी फैमिली बैठी हुई थी। मुझे अब अच्छा लग रहा था ट्रेन ने एक लंबा होरन मारा और उसके धीरे-धीरे ट्रेन चलने लगी, ट्रेन कुछ देर बाद अपनी रफ्तार पकड़ चुकी थी। मैंने भी अपने कान में हेड फोन लगाया मैं आराम से गाना सुनने लगी। वह नौजवान युवक मुझे बार बार देखे जा रहा था उसकी नजरें जैसे मुझ पर जादू कर रही थी उसके अंदर कुछ तो बात थी। मुझे उसे देखकर अच्छा लग रहा था हम दोनों एक दूसरे से नैन मिलाए जा रहे थे लेकिन बात करने की किसी की हिम्मत नहीं हुई ना ही मैंने शुरुआत की और ना ही उस नौजवान युवक ने बात की शुरुआत की तभी अचानक से ट्रेन रुक गई। सब लोग एक दूसरे के चेहरों पर देखने लगे मेरे बगल में बैठे हुए अंकल खड़े उठे और वह बाहर चले गए ना जाने कुछ तो समस्या हो चुकी थी सब लोग ट्रेन से बाहर उतरने लगे। मैंने भी गेट पर जाकर देखा तो ट्रेनों रूकी हुई थी लेकिन कुछ देर बाद धीरे-धीरे ट्रेन चलने लगी और आगे के एक छोटे से स्टेशन में रूकी। वहां पर ट्रेन काफी देर तक रुकी हुई थी ट्रेन में खराबी आ चुकी थी इसलिए ट्रेन वहां पर रुक गई थी।

मैं भी सोचने लगी पता नहीं कितना समय लगेगा मैं अपने मन ही मन मैं अपने आप से बात कर रही थी तभी मेरे सामने बैठे हुए नौजवान युवक ने अपने हाथ को आगे बढ़ाया। उसने मुझसे हाथ मिलाते हुए कहा हाय आए एम राघव। उसके हाथ मिलाने के अंदाज में कोई तो बात थी उसके अंदर का कॉन्फिडेंस देखते ही बनता था। मैंने भी उससे हाथ मिलाते हुए अपना परिचय दिया हम दोनों का परिचय तो हो ही चुका था। उसने कुछ देर बाद अपने चिप्स के पैकेट को खोलते हुए मुझे ऑफर किया और कहा क्या आप लेंगी? मैंने उसे मना कर दिया मैंने उसे कहा मुस्कुराते हुए नहीं कहा तो उसने भी अपने चिप्स के पैकेट को अपने लैपटॉप के बैग में रख दिया। हम दोनों एक दूसरे से बात करने लगे थे राघव ने मुझसे पूछा आप क्या करती हैं? मैंने उसे बताया मैं एक एड एजेंसी में काम करती हूं और उसी के सिलसिले में मैं बेंगलुरु जा रही हूं। राघव मुझसे कहने लगा मेरे भैया भी बेंगलुरु में ऐड एजेंसी में है। मैंने उससे पूछा तुम्हारे भैया कौन सी एड एजेंसी में है। उसने जिस एड एजेंसी का नाम मुझे बताया मुझे उसी कंपनी में काम के सिलसिले में जाना था। मैंने राघव से कहा चलो यह तो बहुत अच्छा हुआ जो तुम से मेरी मुलाकात हो गई। मैने राघव से पूछा तुम क्या करते हो? राघव ने मुझे कहा मैं एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर हूं मैं भी बेंगलुरु में ही जॉब करता हूं। मैंने उससे कहा क्या तुम पुणे के रहने वाले हो? राघव मुझसे कहने लगा हां मैं पुणे में ही रहता हूं हम लोगों की फैमिली 5 साल पहले पुणे में शिफ्ट हो गई थी उससे पहले हम लोग नागपुर में रहते थे। मैंने राघव से कहा चलो कम से कम इस बहाने तुम से तो मुलाकात हुई। हमरा साथ कुछ समय के लिए ही था राघव मेरा अच्छा दोस्त बन चुका था। राघव और मैं आपस में बात कर रहे थे बगल में बैठे हुए अंकल हम दोनों को बड़ी ही अजीब नजरों से देख रहे थे। मुझे कुछ ठीक नहीं लग रहा था ट्रेन चलने लगी थी ट्रेन पूरी रफ्तार से चल रही थी।

हम दोनों आपस में बात कर रहे थे रघाव की भी ट्रेन की सबसे ऊपर वाली सीट थी और मेरी भी ऊपर वाली सीट थी। हम दोनों ही अपनी सीट पर चले गए हम दोनों लेटे हुए थे और एक दूसरे से बात कर रहे थे। हम दोनों को बात करते हुए काफी टाइम हो चुका था तभी एक स्टेशन आया राघव नीचे उतरा। रघाव ने मुझसे पूछा आपके लिए कुछ लेकर आना है? मैंने राघव से कहा नहीं मेरे लिए कुछ नहीं लेकर आना है। राघव स्टेशन  के प्लेटफार्म पर चला गया मैं अपने मोबाइल पर अपनी सहेली से चैटिंग कर रही थी और उसे मैंने बताया कि ट्रेन में मेरी मुलाकात एक लड़के से हुई वह दिखने में बड़ा ही स्मार्ट है। मेरी सहेली मुझे छेड़ रही थी और कह रही थी हमारी कहां ऐसी किस्मत हम तो जब भी जाते हैं तब हमारे अगल-बगल बुड्ढे लोग ही बैठे रहते हैं। मैं उससे चैटिंग के माध्यम से बात कर ही रही थी कि तभी राघव आ गया। राघव ने मुझे पानी की बोतल दी और कहा यह रख लो मैंने वह पानी की बोतल रख ली। राघव अब अपनी सीट पर बैठ चुका था रात होने वाली थी मैं घर से टिफिन लेकर आई थी, खाने का समय भी हो चुका था तो मैंने राघव को भी ऑफर किया। राघव ने मुझे कहा मैं तो कुछ नहीं लाया हूं राघव ने ट्रेन से खाना ऑर्डर कर दिया और हम दोनों ने साथ में रात का डिनर किया। उसके बाद एक दूसरे से हम लोग बातें करने लगे बातें करते करते मुझे नींद भी आने लगी थी। मैंने राघव से कहा मैं अभी आती हूं? मैं बाथरूम में चली गई और कुछ देर बाद में बाथरूम से आई तो राघव बैठा हुआ था। वह मुझे कहने लगा तुम्हें नींद आ रही है?

मैंने उसे कहा नींद तो आ रही है लेकिन जब राघव ने मुझसे यह बात कही तो उसके बाद जैसे मेरी आंखों से नींद गायब हो चुकी थी। रघाव अपने मोबाइल में गेम खेल रहा था मैं राघव की तरफ देखे जा रही थी परंतु मुझे नींद बिल्कुल भी नहीं आ रही थी। मैं सोचने लगी मै राघव से बात करूं मैंने आखिरकार राघव से बात की तो राघव कहने लगा तुम अभी तक सोई नहीं हो मुझे तो लगा था कि तुम सो चुकी होगी। मैने राघव से कहा मुझे नींद नहीं आ रही है।  राघव मुझसे कहने लगा चलो कोई बात नहीं हम दोनों एक दूसरे से बात करते हैं हम दोनों एक दूसरे से धीरे-धीरे बात कर रहे थे तभी राघव ने मुझसे पूछा क्या तुम्हारा कोई बॉयफ्रेंड है? मैंने उसे कहा नहीं मेरा कोई बॉयफ्रेंड नहीं है लेकिन हम दोनों तो जैसे एक दूसरे की बातों में इतना खो गए थे कि मेरा मन राघव के साथ सोने का होने लगा। मैंने अपने स्तनों को राघव को दिखाना शुरू किया जिससे कि वह भी अब उत्तेजित होने लगा था। राघव ने अपने लंड को बाहर निकाला और हिलाना शुरू किया। मै राघव की हिम्मत की दाद देती हूं कि वह कितनी हिम्मत से अपने लंड को हिला रहा था। मुझसे अब रहा नहीं गया और हम दोनों ही बाथरूम में चले गए बाथरूम में जाते ही मैंने राघव के मोटा लंड को अपने हाथ में लिया और उसे हिलाना शुरू किया। उसका लंड और भी ज्यादा कड़क होने लगा था मैंने जैसे ही उसके मोटे लंड को अपने मुंह में लेकर सकिंग करना शुरू किया तो उसे भी मजा आने लगा।

वह मुझे कहने लगा मुझे बड़ा मजा आ रहा है मैंने उसके लंड से चूस चूस कर पानी बाहर निकाल दिया था। उसके लंड से जब पानी बाहर निकल आया तो वह पूरी तरीके से उत्तेजित हो चुका था। जैसे ही उसने मेरी चूत के अंदर अपने लंड को प्रवेश करवाया तो मेरे मुंह से चीख निकली। उसने मेरी चूतड़ों को कसकर पकड़ा हुआ था और बड़ी तेजी से वह मेरी चूत के अंदर अपने लंड को प्रवेश करवाए जा रहा था मेरे मुंह से चीख निकलती। उसने मेरे चूतड़ों को कसकर पकड़ा हुआ था और बड़ी तेजी से वह मुझे धक्के दिए जाता। मैंने ट्रेन की टॉयलेट चैन को पकड़ा हुआ था और वह मेरी चूतड़ों पर बड़ी तेज प्रहार करता जाता। मेरी चूतड़ों का रंग लाल होने लगा था मैं राघव से कहने लगी राघव मुझे बहुत अच्छा लग रहा है तुम्हारा मोटा लंड अपनी चूत में लेकर ऐसा लग रहा है जैसे कि ना जाने बरसो की इच्छा पूरी हो रही हो। राघव मुझे कहने लगा बस कुछ देर की बात है फिर मेरा माल भी गिरने वाला है क्या मैं अपने वीर्य को तुम्हारी योनि में गिरा दू।

जब राघव ने मुझसे पूछा तो मैंने उसे कहा हां क्यों नहीं तुम अपने माल को मेरी योनि में गिरा दो ताकि मुझे भी तो याद रहेगी ट्रेन में सफर करने के दौरान तुमसे मुलाकात हुई थी। राघव कहने लगा तुम बड़ी अच्छी बात करती हो और यह कहते कहते ही उसने अपने वीर्य को मेरी योनि के अंदर प्रवेश करवा दिया। जैसे ही उसका वीर्य मेरी योनि में गया तो मुझे गर्मी सी महसूस होने लगी। मेरी योनि से राघव का वीर्य टपक रहा था, मैंने उसके लंड को चूस कर दोबारा से खड़ा किया और उसे दोबारा से उत्तेजित कर दिया। वह पूरी तरीके से उत्तेजित हो चुका था उसकी उत्तेजना चरम सीमा पर पहुंच चुकी थी उसने मेरी योनि के अंदर अपने लंड को दोबारा प्रवेश करवाया और मुझे उसने काफी देर तक चोदा जिससे कि मैं पूरी तरीके से संतुष्ट हो चुकी थी। उसके बाद मुझे इतनी गहरी नींद आई जब मेरी आंख खुली तो मैं बेंगलुरु पहुंच चुकी थी। बेंगलुरु पहुंचते ही मैं अपने काम के सिलसिले में चली गई लेकिन जैसे ही मैं फ्री हुई तो मैंने राघव को फोन किया और उससे मिलने के लिए उसके फ्लैट में चली गई। जब मैं राघव से मिलने के लिए उसके फ्लैट में गई तो वहां पर भी हम दोनों ने सेक्स का जमकर आनंद लिया।

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