अपनी पुस्तक से मुझे अपनी तरफ मोहित कर लिया

अपनी पुस्तक से मुझे अपनी तरफ मोहित कर लिया

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मेरा नाम प्रीति है मैं जयपुर की रहने वाली हूं, मेरी उम्र 21 वर्ष है और मैं कॉलेज की पढ़ाई कर रही हूं, मैं जिस कॉलेज में पढ़ती हूं उस कॉलेज में मेरे काफी अच्छे दोस्त हैं। मुझे जयपुर में आए हुए अभी दो वर्ष ही हुए हैं क्योंकि मेरे पापा सरकारी नौकरी में है इसलिए उनका ट्रांसफर जोधपुर से जयपुर दो वर्ष पहले हो चुका था और अब हम जयपुर में ही रह रहे हैं। जयपुर में हमारे काफी रिश्तेदार और सगे संबंधी रहते हैं, वह लोग भी कभी हमारे घर आ जाते हैं और कभी मैं अपनी मम्मी के साथ उनके घर चली जाती हूं। मैं पहले से ही जयपुर आती जाती रहती थी इसलिए मुझे जयपुर के बारे में पहले से ही पता था, मुझे जयपुर में एडजेस्ट करने में ज्यादा दिक्कत नहीं हुई। मैं खुले विचारों की हूं लेकिन शायद मेरे खुले विचार मेरे पिताजी को पसंद नहीं है वह हमेशा ही मुझे किसी ना किसी बात को लेकर डांट देते हैं और कहते हैं कि तुम्हारे यह विचार मुझे बिल्कुल भी पसंद नहीं है, उनके और मेरे बीच में ज्यादा बातें नहीं होती, मुझे जब कोई काम होता है तो ही मैं उन्हें कहती हूं।

उनके और मेरे विचार एक दूसरे के बिल्कुल विपरीत है इसलिए हम दोनों एक दूसरे को बिल्कुल पसंद नहीं करते, मुझे मेरे पिताजी का नेचर कुछ अच्छा नहीं लगता। हमारे पड़ोस में एक सुधांशु जी रहते हैं, वह हमारे मोहल्ले के बड़े ही सख्त किस्म के व्यक्ति हैं, उनसे हमारा पूरा मोहल्ला डरता है, वह छोटी सी बात पर भी सब लोगों को डांट देते हैं इसलिए सब लोग उनसे दूरी बनाकर रखते हैं। सुधांशूजी स्कूल में टीचर हैं लेकिन वह किसी भी एंगल से टीचर नहीं लगते क्योंकि जिस प्रकार का उनका नेचर और बात करने का तरीका है वह बड़ा ही गंदा है, वह लोगों के साथ गाली गलौज भी करते हैं और सब लोगों के साथ बड़ी बदतमीजी से पेश आते हैं। हम लोग  उन्हें एक प्रकार से हमारे मोहल्ले का डॉन भी कहते हैं। उनकी शक्ल और सूरत भी बिल्कुल वैसे ही है वह बड़े से चश्मे लगाते हैं, उनके बाल भी ऊपर की तरफ खड़े रहते हैं और वह अपने सर में इतना ज्यादा तेल लगाते हैं कि बिल्कुल भी ऐसा नहीं प्रतीत होता कि वह टीचर हैं, वह बिल्कुल भी अच्छे व्यक्ति नहीं हैं।

मेरी धारणा उनके लिए ऐसी ही थी लेकिन जब एक दिन मैं उनके साथ बात कर रही थी तो मुझे उनके साथ बात कर के बिल्कुल भी ऐसा नहीं लगा कि वह इस प्रकार के व्यक्ति है, वह समाज से थोड़ा हटकर जरूर है लेकिन उनका व्यवहार शायद कहीं ना कहीं ठीक भी है क्योंकि वह किसी को भी गलत काम करने नहीं देते वह उन्हें रोकते हैं इसीलिए शायद सब लोगों ने उन्हें डॉन की उपाधि दे रखी है। मैं जब उनके साथ बात कर रही थी तो वह मुझे बड़ी ही नॉलेज की बातें बता रहे थे और कह रहे थे कि हमारे समाज में बहुत ही गलत भ्रष्टाचार हैं जिसे कि मैं दूर करना चाहता हूं लेकिन सब लोग मेरा विरोध करते हैं और सब लोग मुझे ही गलत ठहराते हैं, शायद इसी वजह से मेरा व्यवहार इतना चिड़चिड़ा हो चुका है और मैं सब लोगों से दूर होने लगा हूं। मैंने उनसे पूछा कि आप ऐसे क्यों हो गए हैं तो उन्होंने मुझे बताया कि मेरे लड़के की जब शादी हुई तो वह बड़ा अच्छा था और कुछ समय तक वह बड़े अच्छे से हमारे साथ रह रहा था लेकिन कुछ समय बाद उसका व्यवहार हमारे लिए बदलने लगा और वह पूरी तरीके से बदल गया। मैंने उनसे पूछा कि ऐसा क्या हुआ कि आप के लड़के का व्यवहार आपके प्रति बदल गया, उन्होंने मुझे बताया की हमने उसे अच्छे स्कूल और कॉलेज में पढ़ाया, मैंने कभी भी उसके लिए कोई कमी नहीं की लेकिन जब से उसकी पत्नी उसके जीवन में आई तब से उसका नेचर ही हमारे प्रति पूरा बदल गया और वह हम पर ही उल्टे आरोप लगाने लगा, हमारे घर पर बहुत ही झगड़े का माहौल रहता था, मैंने उसकी पत्नी को भी कई बार समझाने की कोशिश की परंतु वह हमेशा ही अपना मुंह फुला लेती  और मुझसे बड़े ही गंदे तरीके से बात करती, मैं बहुत ज्यादा परेशान हो गया क्योंकि हमारा एक ही लड़का है और यदि वह हमारे साथ इस प्रकार का व्यवहार करेगा तो शायद हम लोग उसे बर्दाश्त नहीं कर पाए। उसके बाद से  तो मेरा पूरा रवैया बदल गया और मैं समाज के प्रति पूरी तरीके से अपने आप को बदल बैठा हूं, मेरी सोच सिर्फ यही है कि सब लोग अपने परिवार के साथ प्रेम से रहे और सब लोग अपना ध्यान दें लेकिन मैं जब भी किसी को को समझाना चाहता हूं तो वह लोग उल्टा मुझे ही कह देते हैं।

उस दिन मुझे उनके साथ बात करके अच्छा लगा और मुझे भी लगा कि वह इतने भी गलत नहीं है जितने सब लोग उन्हें समझते हैं परंतु सब लोगों की मानसिकता  ही उनके लिए ऐसी बन चुकी है कि वह सबके सामने गलत ही माने जाते है। उसके बाद एक दो बार मैं उनके घर पर भी गई, उनकी पत्नी घर पर ही रहती हैं और वह पहले किसी सरकारी दफ्तर में काम करती थी लेकिन अब उन्होंने नौकरी छोड़ दी है, मुझे नहीं पता था कि मेरा सुधांशु जी के साथ इतना अच्छा संबंध बन जाएगा। वह कॉलोनी में किसी से भी बात नहीं करते थे लेकिन मुझसे वह जरूर बात करते थे और एक दो बार उन्होंने मेरी मदद भी की इसलिए मेरी नजरों में उनकी इज्जत बढ़ गई। एक दिन जब मैं सुधांशु जी के घर पर बैठी हुई थी, उन्होंने मुझे अपनी एक लिखी हुई पुस्तक दिखाइ। उन्होंने मुझे कहा यह पुस्तक मैंने लिखी है, मुझे लगा यह तो बहुत ही विद्वान हैं। सब लोग उनके बारे में बेकार की बातें करते हैं, जब उन्होंने मेरा हाथ पकड़ा तो मुझे थोड़ा अटपटा सा लगा परंतु मैं भी उनकी तरफ आकर्षित हो गई थी। जब उन्होंने मेरी जांघ पर हाथ रख कर फेरना शुरू किया तो मैं उत्तेजित हो गई, मैं घबरा भी गई थी जब उन्होंने अपने काले से लंड को बाहर निकाला तो पहले मैं थोड़ा हिचक रही थी लेकिन जब मैंने उनके लंड को हाथ में पकड़ा तो वह मुझे कहने लगे तुम मेरे लंड को हिलाना शुरु कर दो।

मैंने उनके लंड को हिलाना शुरू कर दिया मै बड़े अच्छे से उनके लंड को हिलाते रही, कुछ देर बाद मैंने उनके लंड को मुंह में ले लिया और चूसने लगी। मैं जब उनके लंड को चूस रही थी तो मुझे अच्छा लग रहा था, मैंने उनके लंड का काफी देर तक रसपान किया। जब मेरी चूत ने पानी छोड़ दिया तो मैं पूरी उत्तेजित हो गई मैंने अपने कपड़े उतार दिए। जब मैंने अपने कपड़े उतारे तो वह मुझे कहने लगे अब मैं तुम्हारी चूत मारता हूं। मैंने अपने सारे कपड़े खोल दिए थे, उन्होंने जब मेरी चूत पर अपनी जीभ को लगाया तो मैं उत्तेजित हो गई। उन्होंने मेरी चिकनी योनि के अंदर जैसे ही अपने कड़क और मोटे लंड को डाला तो मैं चिल्ला रही थी और मेरी योनि  से खून बाहर की तरफ निकलने लगा था। उनके अंदर पूरी जवानी बची थी उन्होंने जिस प्रकार से मुझे चोदना जारी रखा मैं समझ गई कि अपने जमाने में उन्होने बहुत ही चूत मारी होगी। मैं उनसे अपनी चूत मरवाकर अपने आपको बड़ा अच्छा महसूस कर रही थी, उनसे चूत मरवाने में मैं बहुत खुश थी। उन्होंने बड़ी तेजी से मुझे झटके दिए, उन्होंने मुझे इतनी तेज झटके मारे मैं बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं कर पा रही थी लेकिन उसके बावजूद भी मुझे बड़ा मजा आ रहा था। उन्होंने मेरे साथ 5 मिनट तक अच्छे से संभोग किया लेकिन जैसे ही मैं झड़ने वाली थी तो मैंने उन्हें कसकर अपने दोनों पैरों के बीच में जकड़ लिया, उन्होंने मुझे बड़ी तेजी से धक्के मारे, उन्होंने मुझे इतनी तेज धक्के मारे की जब उनका वीर्य पतन हुआ तो मेरी योनि पूरी गर्म हो गई। जब उन्होंने अपने लंड को मेरी योनि से बाहर निकाला तो मेरी योनि खून से लहूलुहान हो चुकी थी, मेरी योनि से बहुत खून बह रहा था। उन्होंने मुझे कपड़ा दिया उसके बाद जब मैंने अपनी योनि को साफ किया तो वह मुझे कहने लगे प्रीति तुम्हारे साथ आज सेक्स करके मुझे मजा आ गया। काफी समय बाद मैंने किसी युवती को चोदा है और इतनी देर से मैं तुम्हारे साथ सेक्स करता रहा था उसके लिए तुम्हारा धन्यवाद कहना चाहता हूं, तुमने मेरी इच्छा पूरी कर दी। मैंने उन्हें कहा मैं अब हमेशा ही आपके पास आऊंगी और आपकी इच्छा पूरी कर दूंगी यह बात सिर्फ मेरे और सुधांशु जी को ही पता है।

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