दोस्त की पत्नी का चूत का भोसड़ा बनाया

दोस्त की पत्नी का चूत का भोसड़ा बनाया

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मेरा नाम शरद है और मैं बेंगलुरु की एक सॉफ्टवेयर कंपनी में इंजीनियर हूं। मुझे यहां पर कार्य करते हुए बहुत वर्ष हो चुके हैं और यहां मेरा सब लोगों से बहुत ही अच्छे से संबंध है। मैं वैसे रहने वाला अंबाला का हूं। मेरी शादी को भी 2 वर्ष हो चुके हैं लेकिन अभी तक मुझे मेरी पत्नी से कोई भी बच्चा नहीं हुआ है। मैं थोड़ा समय और चाहता हूं, उसके बाद ही हम लोग आगे की फैमिली प्लानिंग करेंगे। मेरी पत्नी का नाम मंजू है। वह बहुत ही ज्यादा सिंपल और साधारण तरीके की है। मुझे पहले तो वह बहुत ही अच्छी लगी, जब मेरे घर वाले मुझे उनके घर पर ले गए थे। जिस समय मैं उससे पहली बार मिला तो वह मुझे काफी पसंद आई लेकिन अब भी वह उसी तरीके से अपने जीवन को जी रही है। उसने अपने आप में कोई भी बदलाव नहीं किए हैं और वह बहुत ही ज्यादा बोरिंग किस्म की हो गई है। मैं कभी भी उसे बोलता हूं कहीं घूमने चलते हैं, तो वह साफ मना कर देती है। वह कहने लग जाती है कि मेरा मन नहीं है कहीं भी जाने का। इस वजह से मैं भी थोड़ा परेशान सा रहता हूं। मैं उसे समझाता हूं कि अभी हम दोनों अकेले हैं। उसके बाद हमें बिल्कुल भी समय नहीं मिल पाएगा जब हमारा बच्चा हो जाएगा, लेकिन उसे मेरी कोई भी बात समझ नहीं आती और वह ऐसे ही टाल देती है। कई बार इस चक्कर में हम दोनों के बीच में बहुत ज्यादा झगड़े भी हो जाते हैं। अब तो कुछ ज्यादा ही झगड़े होने लगे हैं लेकिन फिर भी वह मेरी बातों को बिल्कुल भी नहीं समझती है।

मेरे पड़ोस में ही मेरा एक दोस्त है। वह ऑफिस में मेरा जूनियर है और मेरे उससे बहुत ही अच्छी बातचीत है। वह भी अपनी पत्नी के साथ रहता है। मेरे दोस्त का नाम मयंक है और उसकी पत्नी का नाम सीमा है। वह लोग भी हमारे घर पर आते-जाते रहते हैं। हम दोनों ऑफिस में साथ ही जाते हैं और जो भी परेशानियां होती हैं आपस में हम लोग डिस्कस करते रहते हैं। मैंने उसे कई बार अपनी इस समस्या के बारे में भी बताया। मैंने उसे कहा कि मेरी पत्नी बिल्कुल भी मेरे हिसाब से नहीं चलती है। वह बिल्कुल बोरिंग हो चुकी है और अपने आप में ही डूबी रहती है। तभी मयंक कहने लगा, मेरी पत्नी तो बहुत ही ज्यादा मेरा ध्यान रखती है और मैं उसे यदि कहीं घुमाने नहीं ले जाता हूं तो वह मेरी जान के पीछे पड़ जाती है और कहने लग जाती है कि तुम बहुत दिनों से मुझे कहीं भी घुमाने नहीं ले गए हो और  तुमने मुझे कई दिनों से कुछ भी शॉपिंग नहीं करवाई है। यह बात सुनकर मैंने मयंक से कहा तुम इस बारे में सीमा से बात करना। ताकि वह मंजू को कुछ समझा सके। मयंक ने कहा ठीक है। मैं इस बारे में सीमा से बात करूंगा। हम दोनों ऑफिस साथ ही जाते थे। उसने अपनी पत्नी से इस बारे में बात की। तो सीमा ने हां कह दिया कि वह मंजू को इस बारे में समझाएगी।

जिस दिन हम लोगों की छुट्टी थी, उस दिन सीमा हमारे घर आई। मयंक भी उसके साथ में था। उस दिन उन्होंने हमारे घर पर ही लंच किया और हम लोगों ने काफी देर तक बातें भी की। तभी सीमा ने मंजू से भी बात रख दी कि हम लोग तो अभी कुछ दिनों बाद घूमने जा रहे हैं क्या तुम भी घूमने चलोगी। वह कहने लगी ठीक है देखते हैं। उसने बड़े ही हल्के में यह बात ली और इग्नोर कर दिया लेकिन सीमा ने उसे जिद कर के मना ही लिया कि तुम हमारे साथ घूमने चल रही हो। अब हम लोगों ने आपस में बात की तो हम लोग वाटर पार्क घूमने चले गए। हमारा वह दिन तो बहुत ही अच्छा था। हम लोग शाम को घर वापस लौटे तो मैंने सीमा को इसके लिए शुक्रिया कहा और सीमा ने मुझे कहा कोई बात नहीं, ऐसा तो चलता रहता है। ऐसा कहते हुए वह भी अपने घर पर चली गई। सीमा बहुत ही मॉडल हालातों की थी। मैं मंजू को कई बार उसके उदाहरण दिया करता था कि तुम उसके जैसे क्यों नहीं बनती लेकिन वह अपने तरीके से ही रहना पसंद करती थी।

कुछ दिनों बाद मयंक ऑफिस के काम से कहीं बाहर चला गया। मयंक ने मुझे कहा कि तुम सीमा का ध्यान रखना। मैंने उसे कहा तुम चिंता मत करो। तुम आराम से जाओ और जब वहां पहुंच जाओ तो मुझे फोन कर देना। वह ऑफिस के काम से 15 दिनों के लिए बाहर जा रहा था। कभी कबार सीमा भी हमारे घर पर आ जाया करती थी। या फिर मैं उसके घर पर चला जाता और जब मैं घर पर नहीं होता तो तब मंजू उस के घर जाकर उसका हालचाल पूछा आती थी। इसी बीच में एक दिन मंजू की तबीयत बहुत ज्यादा खराब हो गई और मैं उसे हॉस्पिटल ले गया। डॉक्टर ने उसे वहीं एडमिट कर लिया। मैं कुछ दिनों तक हॉस्पिटल में ही था। तभी उस बीच में मयंक का भी मुझे फोन आया और वह कहने लगा तुम कहां हो। मैंने उसे बताया कि मंजू की तबीयत बहुत ज्यादा खराब हो गई है और वह हॉस्पिटल में है। वह मुझे कहने लगा कि सीमा का फोन नहीं लग रहा है, तुम घर जाओगे तो सीमा से मेरी बात करवा देना। मैंने उससे कहा ठीक है मैं घर जा कर देखता हूं उसका फोन क्यों नहीं लग रहा है। मैं जब घर गया तो मैंने देखा उसका दरवाजा खुला हुआ है। मैंने उसे बहुत आवाज दी लेकिन उसने सुना नहीं मैं जैसे ही घर के अंदर गया।

उसने कमरे में बहुत ज्यादा तेज आवाज में गाने लगा रखे थे और मैंने जैसे ही उसे देखा था वह एकदम नंगी बिस्तर पर लेटी हुई थी। उसे देखकर मेरा मन पूरा खराब हो गया। मैंने उसके बड़े-बड़े स्तन और उसकी चूत को देखा तो उसने अपनी चूत में उंगली डाली हुई थी और वह उसे अंदर बाहर करे जा रही थी। मैंने उसे कुछ भी नहीं बोला और मैं चुपचाप ऐसे ही उसे देखता रहा। जब वह चरम सीमा पर थी तो मैं तुरंत ही वहां पहुंच गया और उसे आवाज़ दे दी। वह मुझे ऐसे देखकर एकदम डर सी गई और कहने लगी कि तुम यहां क्या कर रहे हो। मैंने उसे बताया कि तुम्हें इतनी देर से तुम्हारा पति फोन कर रहा है लेकिन तुम उठा ही नहीं रही हो तुम यहां अपने चूत में उंगली कर रही हो और वहां वह परेशान हो रहा है। मैं तुरंत ही उसके पास गया और उसे बड़ी तेजी से पकड़ लिया। अब मैंने उसके स्तनों को अपने मुंह में लेकर चूसना शुरू किया। उसके स्तन बहुत ही गोरे और अच्छे थे। जैसे ही मैं उन्हें अपने मुंह में ले रहा था तो वह बहुत ज्यादा उत्तेजित हो जाती। उसने भी मेरे लंड को तुरंत ही अपने मुंह में ले लिया। वह बहुत देर तक ऐसे ही मेरे लंड को अपने मुंह में चुसती रही जिससे कि मेरे अंदर की उत्तेजना भी बढ़ गई। मुझे उसके बदन को देखकर अब रहा नहीं जा रहा था क्योंकि वह बहुत ही ज्यादा सेक्सी लग रही थी। मैंने उसके दोनों पैरों को चौड़ा करते हुए उसकी चूत मे अपनी जीभ को लगा दिया और ऐसे ही उसकी चूत को चाटने लगा। बहुत देर तक तो ऐसे ही उसकी चूत को चाटता जा रहा था।

उसकी चूत से जो पानी निकलता उसे मैं पूरा पी जाता। उसकी चूत पूरी गीली हो चुकी थी और वह मेरे लिए तैयार थी। मैंने उसकी चूत मे अपने लंड को डाल दिया। मैंने भी तुरंत अपने लड को अंदर तक डाल दिया और बड़ी तेजी से मैं उसे झटके मारने लगा। जैसे ही मैं उससे झटके मार रहा था तो वह बड़ी तेजी से चिल्लाती और बहुत तेज तेज चीखन लग जाती जिससे कि मुझे बहुत मजा आता। अब वह भी बहुत ज्यादा मजे लेने लगी थी उसने अपने दोनों पैरों को अच्छे से चौड़ा कर लिया और मैंने भी उसके दोनों पैरों को कसकर पकड़ लिया। मुझसे जितना हो सकता था उतनी तेज में प्रहार करता जा रहा था। लेकिन उसका भी मन नहीं भर रहा था। मैंने उसके दोनों पैरों को कसकर पकड़ते हुए आपस में मिला लिया। मैने उसके चूतड़ों पर जो प्रहार किया उससे उसकी चूतडो इतनी तेज आवाज निकलती कि वह मुझे कहने लग जाती कि तुमने मेरी चूत का भोसड़ा बना दिया है। मैं ऐसे ही उसे चोदे जा रहा था। जब उसका झड़ने वाला था तो उसने मुझे कस कर अपने पैरों के बीच में जकड़ते हुए कहने लगी कि अब मेरा झड चुका है। मैंने यह सुनते ही अपने लंड को बाहर निकाला और उसके मुंह में डाल दिया। वह उसे बहुत ही अंदर तक ले रही थी थोड़ी देर बाद मेरा भी वीर्य पतन हो गया।

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