घर के दरवाजे खुले हैं

घर के दरवाजे खुले हैं

Antarvasna, kamukta मेरी इलेक्ट्रॉनिक आइटम की एक दुकान है मेरे दुकान में दो लोग काम करते हैं और मुझे अपनी दुकान को खोले हुए 5 वर्ष हो चुके हैं। मैं एक दिन अपनी दुकान से वापस लौट रहा था उस दिन मुझे कुछ काम था तो मैंने सोचा मैं जल्दी ही घर लौट जाता हूं। मैं घर जल्दी आया तो मैंने देखा मीना कहीं दौड़ती हुई जा रही थी मैंने मीना को आवाज देकर रोकने की कोशिश की लेकिन उसने कुछ सुना ही नहीं और वह चली गई मेरी समझ में नहीं आया की वह इतनी तेजी से दौड़ती हुई कहां जा रही थी। मैं जब घर पहुंचा तो मैंने अपनी पत्नी सुरभि से पूछा आज मैंने मीना को देखा वह ना जाने कहां इतनी तेजी से दौड़ती हुई जा रही थी उसने मेरी तरफ देखा तक नहीं। सुरभि कहने लगी बेचारी की तो किस्मत ही ठीक नहीं है पहले उसके पति ने उसे छोड़ दिया और अब उसका लड़का भी उसे परेशान करने पर तुला हुआ है।

मैंने सुरभि से कहा तुम क्या बात कर रही हो तो सुरभी कहने लगी हां मैंने सुना है कि उसका लड़का गलत संगत में पड़ गया है और वह बहुत ज्यादा नशा करता है जिसकी वजह से वह बहुत ज्यादा परेशान रहने लगी है। मीना को हम लोग काफी पहले से जानते हैं उसके पति और मेरे बीच में अच्छी दोस्ती थी लेकिन ना जाने ऐसा क्या हुआ कि वह उन्हें छोड़कर चला गया। सुरेश ने किसी और से शादी करली है और मीना अब अकेली है उस पर उसके लड़के की जिम्मेदारी भी है उसके लड़के की उम्र 16 वर्ष की है लेकिन वह गलत संगत में पड़ चुका है जिस वजह से मीना टेंशन में रहने लगी है। मैंने सुरभि से कहा तुम कभी मीना से इस बारे में बात करना यदि तुम उससे बात करोगी तो उसे अच्छा लगेगा सुरभि कहने लगी हां मैं मीना से मिलती हूं। मेरी पत्नी सुरभि बहुत ही समझदार है, वह अगले दिन मीना से मिली जब वह अगले दिन मीना से मिली तो उसने मीना को समझाया लेकिन मीना अपने दुखों से बहुत ज्यादा परेशान थी वह कहने लगी कि जब से सुरेश ने मुझे छोड़ा है तब से तो मेरी जिंदगी जैसे बद से बदतर होती चली जा रही है। आकाश  भी अब हाथ से निकल चुका है और वह ना जाने किसके संगत में है वह बहुत नशा करने लगा है और मैं बहुत परेशान भी हो गई हूं अभी उसकी उम्र भी इतनी नहीं है कि वह कुछ समझ सके लेकिन मैं जो चाहती थी शायद वह कभी पूरा नहीं हो पाएगा।

मैं चाहती थी कि आकाश पढ़ लिख कर एक बड़ा आदमी बने और वह अपने जीवन में कुछ अच्छा करे लेकिन वह तो हमें ही मुसीबत में डालता जा रहा है। जब यह बात मुझे सुरभि ने बताई तो मैंने सुरभि से कहा तुम चिंता मत करो मैं इस बारे में सुरेश से बात करता हूं, सुरेश से अभी भी मेरी बात होती है लेकिन वह दूसरी जगह रहता है। मैंने सुरेश को एक दिन फोन किया और उसे कहा मुझे तुमसे मिलना था सुरेश मुझे कहने लगा ठीक है मैं तुमसे मिलने के लिए आता हूं सुरेश मुझसे मिलने के लिए आया। जब वह मुझसे मिलने के लिए मेरी शॉप में आया तो मैंने सुरेश को कहा देखो सुरेश तुमने जो मीना के साथ किया वह तुम्हारा आपसी मामला था लेकिन उसके चलते आकाश तुम दोनों के बीच में पिस रहा है तुम्हें आकाश का ध्यान देना चाहिए तुम्हें मालूम भी है की आकाश गलत संगत में पड़ चुका है। ना जाने वह कैसे कैसे लड़कों के साथ रहता है मीना बहुत ज्यादा परेशान रहती है तुम्हें उसका साथ देना चाहिए। सुरेश को भी मेरी बातों का थोड़ा बहुत असर हुआ और वह कहने लगा तुम बिल्कुल ठीक कह रहे हो मुझे ही आकाश से बात करनी पड़ेगी, थोड़ी देर बाद सुरेश मेरी शॉप से चला गया। अगले दिन सुरेश ने मुझे फोन किया और कहा अमित क्या तुम मेरे साथ चल सकते हो मैंने सुरेश से कहा क्यों नहीं हम दोनों आकाश के स्कूल में चले गए। आकाश के लंच के वक्त जब सुरेश और मैं आकाश से मिले तो आकाश सुरेश को देखते ही वहां से बचने की कोशिश करने लगा और वह वहां से अपनी क्लास की तरफ जाने लगा लेकिन मैंने उसे आवाज देते हुए कहा कि बेटा मुझे तुमसे कुछ काम था। आकाश रुक गया क्योंकी वह मेरी बहुत इज्जत करता है, आकाश कहने लगा आप इन्हें कह दीजिये की यहां से चले जाएं मुझे इनकी शक्ल तक नहीं देखनी है और मुझे इनसे कोई बात भी नहीं करनी है।

आकाश के दिल में सुरेश के लिए बहुत ज्यादा नफरत थी और वह सुरेश को बिल्कुल भी पसंद नहीं करता था सुरेश और मीना की गलती आकाश भुगत रहा था लेकिन मैंने उसे समझाया और कहां बेटा देखो बड़ों से ऐसे बात नहीं की जाती हमें तुमसे कुछ बात करनी थी। आकाश मेरी बात मान गया और हम लोग आकाश से बात करने लगे आकाश को जब सुरेश ने कहा कि बेटा मैंने सुना है कि तुम आजकल मम्मी को बहुत ज्यादा परेशान कर रहे हो और तुम्हारी वजह से वह बहुत परेशान रहने लगी है। आकाश कहने लगा आपने तो अपनी जिम्मेदारी से मुंह मोड़ लिया है और अब आपको मेरे और मां के बीच में बोलने की कोई जरूरत नहीं है। मैंने आकाश को समझाया और कहा देखो बेटा तुम्हारे पिताजी और तुम्हारी मां के बीच में जो भी झगड़े थे वह सब बातें अब तुम भूल जाओ तुम अपनी पढ़ाई पर ध्यान दो। मैंने उसे समझाया तुम गलत संगत में पड़ रहे हो जिसकी वजह से तुम्हारी मां बहुत परेशान रहने लगी है उसका तुम्हारे सिवा इस दुनिया में आखिर है कौन इसलिए तुम्हें उसकी देखभाल करनी चाहिए और उसकी बातों को मानना चाहिए। शायद मेरी बातों का आकाश पर कुछ असर पड़ रहा था फिर सुरेश ने भी उसे समझाया तो आकाश पर हमारी बातों का थोड़ा बहुत असर तो पड़ा ही था उसके बाद उसने अपने दोस्तों की दोस्ती छोड़ दी और अब वह पढ़ाई पर ध्यान देने लगा था।

मैं एक दिन मीना से मिलने के लिए उसके घर पर गया उस दिन आकाश भी घर पर ही था मैंने आकाश से पूछा बेटा तुम्हारी पढ़ाई कैसी चल रही है तो वह कहने लगा मेरी पढ़ाई तो ठीक चल रही है और अभी मैं खेलने के लिए जा रहा था। मैंने आकाश से कहा तुम कहां जा रहे हो वह कहने लगा कि हम लोग फुटबॉल खेलने के लिए जा रहे हैं और फिर वह चला गया जब वह गया तो मैंने मीना से पूछा अब तो आकाश ठीक है ना मीना कहने लगी मैं आपका एहसान कैसे चुका सकती हूं। मैंने मीना से कहा इसमें एहसान की क्या बात है आकाश गलत रास्ते पर था तो मैंने उसे समझाया और सुरेश ने भी उसे समझाया, मीना आकाश से भीत प्यार करती थी। मीना ने मुझे कहा आपने हमारी हमेशा ही मदद की है और सुरभि भी मुझे हमेशा समझाती रहती है आप लोग मेरा बहुत बड़ा सहारा हो। मैंने मीना से कहा तुम्हारे ऊपर अब आकाश की जिम्मेदारी है और तुम्हें चिंता करने की जरूरत नहीं है हमसे जितना हो सकेगा हम लोग आकाश के लिए उतना करेंगे। मीना कहने लगी आपने अपनी दोस्ती का फर्ज बखूबी निभाया है लेकिन सुरेश ने मेरे साथ बहुत बड़ा धोखा किया मैंने मीना से कहा तुम यह सब बातें भूल जाओ और आकाश की पढ़ाई पर ध्यान दो। तुम कोशिश करो कि वह अच्छे से पढ़ाई कर सके ताकि वह अपने जीवन में आगे बढ़ सके,  मैंने मीना से कहा मैं अभी चलता हूं और मैं वहां से चला गया। मीना बहुत ज्यादा परेशान रहती थी लेकिन उसे मेरा और सुरभि का बहुत सपोर्ट मिलता था काफी समय हो चुका थे मैं मीना से नहीं मिला था। मैं जब मीना से मिलने के लिए जा रहा था तभी आकाश मुझे दिखा मैंने आकाश से पूछा क्या मम्मी घर पर है तो वह कहने लगे हां मम्मी घर पर ही हैं।

मैं जैसे ही घर के अंदर गया तो मैंने जब घर का नजारा देखा तो मै देखकर दंग रह गया मीना अपनी चूत पर तेल लगा रही थी और वह केले को अपनी चूत में ले रही थी मैं यह देखकर दंग रह गया। मीना ने भी मुझे देख लिया था वह शर्माने लगी लेकिन उसके स्तन और उसकी बड़ी गांड को देख कर मैं अपने आप पर काबू नहीं कर पाया और जैसे ही मैं अंदर गया तो मैंने मीना की चूत मे उंगली डाली तो वह मचलने लगी और उसे बहुत मजा आने लगा। मैंने मीना से कहा तुम्हारी चूत तो बड़ी रसीली है उसने मेरे लंड को बाहर निकाला वह मेरे लंड को देखकर कहने लगी आपका लंड भी तो कम नहीं है। मैंने उसे कहा तुम मेरे लंड को अपनी चूत में लोगी तो वह कहने लगी क्यों नहीं इतने बरसों से मेरी चूत सूनी पड़ी है। उसने मेरे लंड को अपने मुंह के अंदर ले लिया वह उसे चूसने लगी जब वह मेरे लंड को चुसती तो उसे बहुत मजा आता और मुझे भी बहुत आनंद आ रहा था।

मैंने जैसे ही मीना की चूत के अंदर अपने लंड को डाला वह चिल्लाने लगी और मैं बड़ी तेजी से उसे धक्के देने लगा मुझे उसकी चूत मारने में बड़ा मजा आ रहा था। जब मैं उसे धकके देता तो उसे भी बड़ा आनंद आता काफी देर तक मैं उसे धक्के मारता रहा। उसके अंदर की गर्मी को मैंने शांत करने की कोशिश की लेकिन उसके अंदर की गर्मी शांत ही नहीं हो रही थी जैसे ही मैंने अपने लंड पर तेल लगाया और मीना की गांड के अंदर डाला तो वह कहने लगी अब मजा आ रहा है। मुझे उसकी गांड मारने में बड़ा मजा आता मैं तेजी से उसे धक्के दिए जा रहा था मैंने उसकी गांड के मजे बड़े ही अच्छे से लिए जैसे ही उसकी गांड के अंदर मेरा वीर्य गिरा तो वह मुझे कहने लगी मुझे आज मजा आ गया। आपने मेरा कितना साथ दिया है और आज आपने मुझे खुश कर दिया है मैंने उसे कहा मुझे नहीं मालूम था कि तुम इतनी सेक्सी हो और तुम कितना तड़प रही थी यदि तुम मुझे पहले इस बारे में कहती तो मैं तुम्हारी इच्छा कब की पूरी कर चुका होता। मीना कहने लगी आपका जब भी मन हो तो आप आ जाइएगा आपके लिए हमेशा घर के दरवाजे खूले है जब चाहे आप मुझे चोद लीजिएगा।

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