आओ तुम्हे खीर खिलाती हूं

आओ तुम्हे खीर खिलाती हूं

Antarvasna, desi kahani घर में छोटा होने की वजह से हमेशा मुझे मेरी मां का प्यार सबसे अधिक मिला मेरे पिताजी भी मुझसे बहुत प्यार करते थे कभी कबार वह मुझ पर गुस्सा भी हो जाय करते थे। मेरे बड़े भैया अमित मुझसे हमेशा झगड़ते रहते थे वह कहते कि तुम्हारी दोस्ती बिल्कुल भी ठीक नहीं है। बचपन से ही हम दोनों के बीच बहुत झगड़े होते थे लेकिन वह सिर्फ बचपन का दौर था समय के साथ अब हम बड़े हो चुके है। अमित भैया और मैंने मिलकर अपनी एक कंपनी शुरू कि हम दोनों ने जब वह कंपनी सुरु की तो हमने उसमें अपनी पूरी मेहनत लगा दी जिससे कि हम दोनों का काम अच्छा चलने लगा। जैसे जैसे समय बीतता जा रहा था वैसे सब कुछ ठीक हो चुका था लेकिन मुझे क्या पता था कि जब हम दोनों की कंपनी अच्छे से चलने लगेगी तो हमारी भाभी की वजह से हमारे घर में झगड़े शुरू हो जाएंगे।

भाभी अपने घर की इकलौती थी भाभी का नाम पायल है भाभी और भैया के बीच में लव मैरिज हुई थी लेकिन भाभी के नखरे सिर्फ भैया ही सह सकते थे वह भाभी को कभी कुछ नहीं कहते थे। हमारी बहन की शादी भी हम लोगों ने बड़े धूमधाम से करवाई हमारा खुशहाल परिवार अब जैसे जंग का मैदान बनने वाला था और यह सिर्फ मेरी भाभी की वजह से ही हुआ। हमारी खुशियां जैसे गायब हो चुकी थी भाभी ने हम दोनों भाइयों के बीच में दरार पैदा करवा दी जिसकी वजह से अब हमारी कंपनी में भी नुकसान होने लगा। भैया का काम पर ध्यान ही नहीं रहता था और वह मेरे भरोसे ही कंपनी को चला रहे थे लेकिन मैं अकेला कितना काम करता जिसकी वजह से अब कंपनी में लगातार नुकसान होते जा रहे थे। हम लोगों के हाथ से कई बड़े प्रोजेक्ट भी निकल चुके थे मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा था कि क्या करूं लेकिन मेरे पिताजी ने मुझे कहा कि देखो बेटा गौरव तुम और अमित एक दूसरे से कभी अलग मत होना। वह मुझ पर बहुत भरोसा करते थे लेकिन मेरे भैया और भाभी शायद हम लोगों से अलग होना चाहते थे। मेरी भाभी ने हम दोनों के बीच में जो दरार पैदा की थी वह बढ़ती ही जा रही थी।

एक दिन अमित भैया ने मुझसे कहा कि गौरव मुझे तुमसे बात करनी है मैंने भैया से कहा हां भैया कहिये भैया कहने लगे कि मैं तुमसे अकेले में बात करना चाहता हूं। भैया ने मुझे कहा कि देखो गौरव मैं चाहता हूं कि हम दोनों को कंपनियां अब अलग कर लेनी चाहिए और कंपनी के दो हिस्से हमें कर लेनी चाहिए। मैंने भैया से कहा भैया आप यह किस प्रकार की बात कर रहे हैं हम दोनों ने मिलकर इस कंपनी को खड़ा किया था और मैं नही चाहता कि हमे यह कंपनी अलग करनी चाहिए। मैंने भैया को मना कर दिया था और मैं किसी भी सूरत में कंपनी को अलग नहीं करना चाहता था। मैंने जब इस बारे में पिताजी से सलाह मशवरा किया तो पिताजी कहने लगे बेटा यदि तुम दोनों के बीच किसी बात को लेकर अनबन है तो तुम दोनों को बात करनी चाहिए। मैंने पापा से कहा ऐसा कुछ भी नहीं है लेकिन भैया को ना जाने क्या हो गया है वह अब हर चीज के लिए अपने हिस्से की बात करने लगते हैं। मैंने कभी ऐसा नहीं सोचा था लेकिन कुछ समय से मैं देख रहा हूं कि भैया में काफी बदलाव आ चुका है भैया अब पूरी तरीके से बना चुके हैं। पिताजी इस बात से बहुत दुखी थे लेकिन मेरे पास भी उस वक्त कोई रास्ता नहीं था मैंने भैया से कहा कि भैया आप कंपनी को अलग मत कीजिए बल्कि हम लोग कंपनी को भेज देते हैं। हम लोगों ने अपनी कंपनी को बेचने का फैसला कर लिया था भैया इस बात से तैयार हो चुके थे हमारे इतने वर्षो की मेहनत पानी हो चुकी थी लेकिन भैया को इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ रहा था वह तो सिर्फ पायल भाभी के कहने के अनुसार ही चल रहे थे। मुझे इस बात का बहुत दुख था कि अब सब कुछ अलग होता जा रहा है और भैया और भाभी ने अलग रहने का भी फैसला कर लिया था। भाभी को ना जाने हम लोगों से ऐसी क्या समस्या थी वह हमारे साथ बिल्कुल भी एडजेस्ट नहीं कर पा रही थी और आए दिन भाभी मां के साथ झगड़ती रहती थी। ऐसा ना जाने क्या था कि पायल भाभी हमेशा मां के साथ झगड़ा करती रहती थी जबाकी मां का स्वभाव तो बिल्कुल ऐसा नहीं है उसके बावजूद भी पायल भाभी हमेशा मां से झगड़ते रहती।

वह मां को काफी गलत भी कहती थी लेकिन मां हमेशा चुप हो जाती मां भाभी के कड़वी बातों को सह लेती थी। भैया अब अलग रहने के लिए भी जा चुके थे और कंपनी भी बिक चुकी थी हम दोनों भाइयों ने आधा आधा हिस्सा अपने पास रख लिया था पैसे का भी बंटवारा हो चुका था और अब दोनों का भी बंटवारा हो चुका था। भैया पापा मम्मी से मिलने के लिए भी नहीं आते थे मैं अब अकेला हो चुका था कई बार मुझे लगता कि भाभी के आने से भैया में इतना परिवर्तन है कि उन्होंने घर से तक जाने का फैसला कर लिया। जब हमारी छोटी बहन आती तो वह हमेशा भैया के बारे में पूछा करती थी कि भैया क्या कर रहे है लेकिन भैया कहां घर आने वाले थे भैया तो भाभी की बात मानते थे और हमेशा उनके अनुसार ही चलते थे। भैया ने अपना बिजनेस शुरू किया तो उसमे उनका नुकसान हो चुका था और नुकसान की भरपाई कर पाना मुश्किल था। मुझे जब यह बात पता चली तो मैंने उन्हें कुछ पैसे भी दिए पहले तो वह मना कर रहे थे लेकिन उसके बाद भी मैंने उनकी मदद की और उन्हें पैसे दिए। भाभी को फिर भी इस बात का एहसास नहीं हुआ कि वह हम दोनों भाइयों के बीच में दरार पैदा कर चुकी थी और यह सब उनकी वजह से ही हुआ था। मेरे जीवन में अभी तक कोई भी लड़की नहीं आई थी लेकिन मेंरे जीवन मे जब महिमा आई तो मैं महिमा के साथ अच्छा समय बिताने लगा।

मुझे महिमा के साथ अच्छा लगने लगा था धीरे धीरे हम दोनों की दोस्ती बढ़ती जा रही थी महिमा हमारे पड़ोस में ही रहने के लिए आई थी और वह डॉक्टर है। मैं महिमा के पास अपनी मां को इलाज के लिए लेकर गया था तब से महिमा से मेरी अच्छी बातचीत हो चुकी थी और उसके बाद हम दोनों को जब भी समय मिलता तो हम लोग एक दूसरे के साथ अच्छा समय बिताया करते। मैं महिमा से फोन पर भी बातें कर लिया करता था महिमा मुझे पसंद आने लगी थी और वह भी हमारे घर पर कई बार आ जाया करती थी। एक दिन मेरी मां ने मुझसे कहा कि बेटा तुम्हें महिमा बहुत पसंद है ना तो मैंने उन्हें कहा नहीं मां ऐसा तो कुछ भी नहीं है। मैंने यह बात किसी को भी नहीं बताई थी लेकिन मेरी मां ने मेरी आंखों को पढ़ लिया था और उन्होंने जब यह बात कही तो मैं उन्हें मना करने की कोशिश करने लगा लेकिन मेरी नजरों से मेरी मां ने मुझे पकड़ लिया और कहने लगी बेटा तुम महिमा से प्यार करते हो। मेरी मां कहने लगी तुम महिमा से शादी कर लो। मेरे अंदर बिल्कुल भी हिम्मत नहीं थी कि मैं महिमा से शादी के बात करूं इसलिए हम दोनों का रिश्ता सिर्फ दोस्ती तक ही था। मैंने महिमा से इस बारे में बात नहीं की थी एक दिन हम दोनों कार में बैठे हुए थे उस दिन गलती से मेरा हाथ महिमा की जांघ पर लग गया। वह मुझे देखने लगी मैं भी उसकी आंखों की तरफ देख रहा था तभी हम दोनों के अंदर शायद जवानी फूटने लगी मैंने महिमा के होठों को चूसना शुरू कर दिया। मैंने जब महिमा के नरम और गुलाबी होठों को चूसना शुरू किया तो उसे भी बहुत अच्छा लग रहा था। पहली बार ही हम दोनों के बीच किस हुआ था लेकिन इसके आगे हम दोनों ने कुछ भी नहीं किया मैं अपने घर चला आया महिमा भी अपने घर चली गई। महिमा ने मुझे पलट कर भी नहीं देखा महिमा और मैंने बात नहीं की। महिमा का मुझे दो दिन बाद फोन आया तो महिमा मुझे कहने लगी गौरव क्या तुम फ्री हो?

मैंने महिमा से कहा हां बताओ क्या कोई काम था। महिमा कहने लगी हां मैंने तुम्हारे लिए खीर बनाई है क्या तुम घर पर आ सकते हो। मुझे खीर बहुत पसंद है इसलिए मैं महिमा से मिलने के लिए चला गया जब मैं महिमा से मिलने गया तो हम दोनों साथ में बैठ कर बात कर ही रहे थे कि मेरी नजर महिमा के बदन से हट ही नहीं रही थी। मैंने महिमा के होठों को किस किया हम दोनों की उत्तेजना पूरी तरीके से बढ गई थी। मैंने महिमा को बिस्तर पर लेटा दिया जब मैंने महिमा के स्तनों का रसपान करना शुरू किया तो वह पूरी तरीके से उत्तेजित हो चुकी थी। मैंने महिमा की पैंटी को उतारते हुए उसकी योनि पर अपनी उंगलियों से सहलाना शुरू किया। उसकी योनि से पानी बाहर की तरफ निकलने लगा था वह पूरी तरीके से उत्तेजित हो चुकी थी। महिमा ने मेरे लंड को अपने हाथ में ले लिया और उसे हिलाने लगी।

जब वह मेरे लंड को हिलाती तो मेरे अंदर भी जोश पैदा हो जाता और जिस प्रकार से वह मेरे लंड को हिला रही थी तो मैं पूरी तरीके से उत्तेजित हो चुका था। मैंने जैसे ही महिमा की योनि के अंदर अपने लंड को प्रवेश करवाया तो वह मुझे कहने लगी आज तो मजा आ गया। मैं महिमा को बड़ी तेजी से धक्के देने लगा मेरे धक्को में तेजी आती जा रही थी महिमा भी पूरी तरीके से जोश में आ चुकी थी। महिमा ने मेरा पूरा साथ दिया लेकिन जब वह अपने पैरों से मुझे जकडने लगी तो मैं बहुत ही ज्यादा उत्तेजित हो गया। महिमा झड़ चुकी थी मैं उसे अब भी उतनी ही तेजी से धक्के दिए जा रहा था। जितने तेजी से मे धक्के मार रहा था उससे आखिरकार मेरा वीर्य अब मेरे अंडकोष से बाहर की तरफ आ गया। जैसे ही मेरा वीर्य गिरने वाला था तो मैंने अपने वीर्य को महिमा की योनि के अंदर प्रवेश करवा दिया। महिमा की योनि में मेरा वीर्य जाते ही वह मुझसे गले लगने लगी हम दोनों एक हो गए। अब तक हम दोनों ने एक दूसरे से दिल की बात नहीं कही थी लेकिन मुझे महिमा का साथ बहुत अच्छा लगता है।

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