साथ काम करने वाली की चूत और मेरी अन्तर्वासना

साथ काम करने वाली की चूत और मेरी अन्तर्वासना

हेल्लो मेरे प्यारे भाई लोगों कैसे हैं आप सभी और कैसा है आपका लंड ? तो मतलब मैं ये मानलूं ना कि आपका लंड और आप दोनों अच्छे हैं | ठीक है मान लेता हूँ पर छोटी नुन्नु वाले कृपया इस कहानी से दूर रहे क्यूंकि ये मर्द और बड़े लंड वालों की कहानी है | अरे दोस्तों मजाक कर रहा हूँ मैं तो ऐसा कुछ नहीं ये सब के लिए है और सब इसे पढके मज़ा लो | तो अब शुरू करता हूँ मैं अपना परिचय देना और मेरा नाम है कृष्णा | हाँ जैसा मेरा नाम है वैसा ही मेरा काम है मैं गोपियों को बहुत पसंद करता हूँ और उन्हें हमेशा अपनी बांसुरी बजाने के लिए देता हूँ | बांसुरी से मेरा मतलब मेरे लंड से है और वो लड़कियां भी इसको दिल खोल के बजाती हैं जब इससे गीला गीला और गरमा गरम मुठ बाहर न निकल आये | जैसे ही वो बाहर निकलता है तब मेरा काम शुरू होता है और मैं उसकी फुद्दी को जमके बजाता हूँ और तब तक बताता हूँ जब तक उनका माल मेरे लंड को गीला न कर दे | आज की जो कहानी है वो आधारित है मेरे जीवन के ऐसे अंश पे जो मैं याद करता हूँ तो मुझे अपार शान्ति मिलती है क्यूंकि वो मेरा पहला प्यार था और शायद हमेशा वो ही रहेगा | उसका नाम महिमा था और मेरे साथ काम करती थी | जी हाँ मैं एक काम करने वाला बंदा हूँ और मैं नगर निगम में झाड़ू लगाने का काम करता हूँ | वो भी मेरे साथ ही झाड़ू लगाने जाती थी पर मुझे पता ही नहीं चला कब मैंने उसकी चूत पे हाथ साफ़ कर दिया | क्या गदराया हुआ बदन क्या मोटे मोटे दूध और कमर | और गांड तो ऐसी जैसे उसपे सर रखके सो जाओ और तकिये की ज़रूरत न पड़े | मैंने उससे कई बार कहा मेरी हो जा पर वो मानी ही नहीं पर हाँ चुदने के लिए वो आज भी तैयार रहती है और मैं भी कभी पीछे नहीं हटना चाहता था पर नौकरी है जहा ले जाए | इसलिए मैंने उसको बस दो साल तक चोदा फिर उसके बाद मुझे इ जगह भेज दिया और उसको भी कही और भेज दिया गया नगर निगम के द्वारा |

पर मुझे आज भी लगता है जैसे हम कभी न कभी मिलेंगे और फिर से जमके चुदाई करेंगे | पर अभी तक तो कुछ हो नहीं पाया है और मुझे उम्मीद है की हो जाये तो बस मज़ा आ जाये | तो दोस्तों अब मैं सुनाता हु आपको वो दास्ताँ जिसका आप बेसब्री से इंतज़ार कर रहे हैं और मैं भी | महिमा एक गरीब घर से थी और हम लोग एक ही मोहल्ले के थे तो हमारा आना जाना साथ होता था | एक दिन हम दोनों निर्मल वार्ड में झाड़ू लगा रहे थे तभी हमारा ठेकेदार आया और उससे कहा महिमा तुम्हरे घर में आग लग गयी है मेरे पास फोन आया है जल्दी चलो | अब मैं तो उसके साथ वाला ही था इसलिए मैंने कहा साहब मैं भी चलूँ क्यूंकि मेरा घर भी इसके घर के पास है कही आग फ़ैल गयी तो मेरा सब कुछ बर्बाद न हो जाए | उसने कहा ठीक है तुम दोनों जाओ तब तक मैं इस वार्ड में किसी और को काम पे लगा देता हूँ | हम दोनों निकले तो देखा पूरी बस्ती में आग थी पर मेरा घर पीछे था तो उसका कुछ हिस्सा ही जल पाया था | अब जब आग बुझ गयी तब महिमा अपने घर गयी और मैं भी उसके साथ गया तो देखा सब कुछ खाख हो चुका था और उसका रो रो के बुरा हाल हो गया था | मैंने सोचा इसको गले लगा लेता हूँ | पर मैंने बस उसके कंधे पे हाथ रखा और उससे कहा डर मत सब ठीक हो जाएगा | वो मेरे गले लग गयी और रोने लगी और कहा अब मेरा क्या होगा मैं कहाँ जाउंगी | मैंने कहा मेरा घर मतलब तेरा घर जब तक सब कुछ ठीक नहीं हो जाता तू मेरे घर में रह सकती है | फिर अगले दिन ठेकेदार से हूँ दोनों मिले और कहा साहब सब कुछ जल गया इसके घर में अगर आप हमारे पेसे आज दे डोज तो इसका घर फिरसे बनवाना शुरू कर सकते हैं | उसने मौके की नजाकत को समझा और पैसे दे दिए | ५००० रुपये महिना मिलते हैं हम लोगों को और उसने तीन हज़ार रुपये में घर बनवाने का थोडा सामान मंगवाया और मैंने भी एक हज़ार की मदद कर दी |

अब उसका घर बनना शुरू हो गया था और चार दिन ही काम चला क्यूंकि माल ख़तम हो गया था और पैसे भी नहीं थे पर उसके घर की आधी आधी दीवारें बन गयी थी और ये देखकर मुझे बड़ा सुकून मिल रहा था | वो तो तब से मेरे घर में ही थी पर आज उसने सुबह उठके पानी भर दिया चाय नाश्ता करा दिया और मुझे और भी ज्यादा अच्छा लगने लगा क्यूंकि ये सब करने वाला मेरे लिए कोई नहीं था | मैंने उससे पुछा ये क्यों कर रही है महिमा मैंने तो कहा नहीं तुझे ये सब करने के लिए ? तब उसने कहा तेरे घर में रह रही हूँ किराया तू लेगा नहीं तो यही कर देती हूँ | और वैसे भी कौन रखता है किसी को अपने घर में आज के समय में | मैंने कहा तेरे लिए तो मै नंगा नाचने लगूंगा और वो ये सुनके हसने लगी | फिर हम काम पे निकल गये और एक साथ काम कर रहे थे तब गलती से मेरा हाथ उसके द्दोह पे लग गया | उसने कहा ठीक से काम कर | मैंने कहा अच्छा तुझे ऐसा करना बुरा लगता है क्या और उसके दूध पे फिर से हाथ लगा दिया | अब उसने कहा अरे यार क्या कर रहा है | वहां कोई नहीं था इसलिए मैं उसके पास गया और उसके दूध को अच्छे से पकड़ते हुए बोला कि तेरे दूध को मसल रहा हूँ | उसने कहा चल काम कर अपना और मैंने कहा ठीक है और उसके दूध पे पप्पी लेके काम करने लगा | मैंने जब उसको देखा तो वो हल्का सा मुस्कुरा रही थी और मुझे लगा आज मेरे घर में दंगल होने वाला है | और मैं भी मन ही मन खुश होने लगा | फिर जब वो जाने लगी तो मैंने उसकी गांड पे हाथ फेरा और कहा बहुत गरम है रे ये तो | तब उसने मुझसे कहा चाट ले न तू भी गरम हो जाएगा | मैंने कहा अरे कहाँ जा रही है वो बोली कि ठेकेदार से पैसे ले लूँ और माल माँगा लुंगी तो काम चालू हो जाएगा | मैंने कहा ठीक है चली जा और मेरा भी ले लेना | उसने मेरे पैसे भी ले लिए और मुझे लाकर दे दिए | मैंने उसे एक हज़ार दिए और कहा ले और मिला दिए काम थोडा सा ज्यादा हो जाएगा |

 

मैं सब्जी लेकर शाम को घर आया और महिमा खाना बनाने की तैयारी कर चुकी थी बस सब्जी काट के बनाना बाकी था | उसने सब कुछ बनाया और हमलोगों ने खाना खाया | वेसे तो हम लोग एक ही कमरे में सोते थे पर इस बार मैं उससे जाके सैट गया और उसके पेट और नाभि में हाथ फिराने लगा | वो मेरी तरफ पलती और कहा मैं समझती हूँ तुझे क्या चाहिए | मैंने कहा तो दे दे न उसने कहा इतनी आसानी से दे दूँ क्या | थोड़ी मेहनत कर मुझे गरम कर और फिर करले मेरी चुदाई | मैंने उसके होंटों को चूमना चालु कर दिया और उसके बाद उसके दूध को ब्लाउज के ऊपर से मसलना चालु कर दिया और फिर उसके निप्पल को चूसने लगा | थोड़ी देर बाद जब उसके निप्पल कड़े हो गये और मैंने उनपे हलके से काटा और फिर से चूसना शुरू किया | वो ऊऊउम्म्म्म ऊऊन्न्ह्ह आआआअह्हह्हह्ह ऊऊऊऊऊऊऊऊऊओ आआअह्ह्ह्ह्ह्ह्ह् आअह्ह्ह्हऊऊउम्म्म्म ऊऊन्न्ह्ह आआआअह्हह्हह्ह ऊऊऊऊऊऊऊऊऊओ आआअह्ह्ह्ह्ह्ह्ह् आअह्ह्ह्हऊऊउम्म्म्म ऊऊन्न्ह्ह आआआअह्हह्हह्ह ऊऊऊऊऊऊऊऊऊओ आआअह्ह्ह्ह्ह्ह्ह् आअह्ह्ह्ह कर रहे थे | उसके बाद एक बन्दे ने मेरी गांड के छेद में अपना लंड आला और एक ने मेरी चूत में और एक का लंड मेरे मुह में ही था | मैं बड़ी जोर जोर से ऊऊउम्म्म्म ऊऊन्न्ह्ह आआआअह्हह्हह्ह ऊऊऊऊऊऊऊऊऊओ आआअह्ह्ह्ह्ह्ह्ह् आअह्ह्ह्हऊऊउम्म्म्म ऊऊन्न्ह्ह आआआअह्हह्हह्ह ऊऊऊऊऊऊऊऊऊओ आआअह्ह्ह्ह्ह्ह्ह् आअह्ह्ह्हऊऊउम्म्म्म ऊऊन्न्ह्ह आआआअह्हह्हह्ह ऊऊऊऊऊऊऊऊऊओ आआअह्ह्ह्ह्ह्ह्ह् आअह्ह्ह्ह करने लगी | थोड़ी देर बाद मैंने उसकी साड़ी को ऊपर किया और उसकी गीली चूत में ऊँगली डालने लगा और वो थोडा जोर से ऊऊउम्म्म्म ऊऊन्न्ह्ह आआआअह्हह्हह्ह ऊऊऊऊऊऊऊऊऊओ आआअह्ह्ह्ह्ह्ह्ह् आअह्ह्ह्हऊऊउम्म्म्म ऊऊन्न्ह्ह आआआअह्हह्हह्ह ऊऊऊऊऊऊऊऊऊओ आआअह्ह्ह्ह्ह्ह्ह् आअह्ह्ह्हऊऊउम्म्म्म ऊऊन्न्ह्ह आआआअह्हह्हह्ह ऊऊऊऊऊऊऊऊऊओ आआअह्ह्ह्ह्ह्ह्ह् आअह्ह्ह्ह कर रहे थे | उसके बाद एक बन्दे ने मेरी गांड के छेद में अपना लंड आला और एक ने मेरी चूत में और एक का लंड मेरे मुह में ही था | मैं बड़ी जोर जोर से ऊऊउम्म्म्म ऊऊन्न्ह्ह आआआअह्हह्हह्ह ऊऊऊऊऊऊऊऊऊओ आआअह्ह्ह्ह्ह्ह्ह् आअह्ह्ह्हऊऊउम्म्म्म ऊऊन्न्ह्ह आआआअह्हह्हह्ह ऊऊऊऊऊऊऊऊऊओ आआअह्ह्ह्ह्ह्ह्ह् आअह्ह्ह्हऊऊउम्म्म्म ऊऊन्न्ह्ह आआआअह्हह्हह्ह ऊऊऊऊऊऊऊऊऊओ आआअह्ह्ह्ह्ह्ह्ह् आअह्ह्ह्ह करने लगी | मुझे लगा लंड डालने का यही सही समय है और मैंने उसकी चूत में लंड डाला और वो सिस्कारियां भरने लगी और मुझे कहने लगी चोद ले अब तो तुजसे ही चुदवाउंगी | मैंने उसको तीन घंटे तक चोदा और उसकी चूत को चोद चोद के फाड़ दिया | उसकी चूत से सफ़ेद पानी निकल रहा था पर मेरा माल नहीं गिरा | मैंने उसको उठाया और उसकी गांड में लंड पेल दिया | फिर उसको एक घंटे और चोदा और उसकी गांड के अन्दर ही माल गिराया |

 

अब मैं उसको रोज़ चोदता और उसकी गांड पे सर रखके सोता और उसे भी बहुत अच्छा लगता ये सब |

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