दुखों का पहाड़ था पर मस्त हसीना का साथ था

दुखों का पहाड़ था पर मस्त हसीना का साथ था

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मेरा नाम गिरीश है मैं लखनऊ का रहने वाला हूं। मेरी उम्र 55 वर्ष है। मेरी गलती की वजह से मुझे कई साल तो अकेले रहना पड़ा। मेरी पत्नी ने मुझे छोड़ दिया था मेरी पत्नी का नाम रमा है। वह मुंबई में रहती है और मेरी आदतों की वजह से उसने मुझे छोड़ दिया था क्योंकि मुझे शराब की बड़ी गंदी लत थी और मेरा एक महिला के साथ अफेयर भी था। मेरी पत्नी को जब इस बात की भनक हुई तो उसने मुझसे कहा कि यदि आप नहीं सुधरेंगे तो मैं आपको छोड़ दूंगी। मुझे ऐसा लगा कि शायद वह ऐसे ही कह रही होगी लेकिन वह एक दिन बिना बताए मुंबई चली गयी और उससे मेरा कई सालों तक कोई संपर्क नहीं रहा। वह मेरे बच्चों को भी अपने साथ ले गई। मैं काफी वर्षों तक उसे नहीं मिला।

एक दिन जब उसका मुझे फोन आया तो मैं इतना ज्यादा खुश हुआ कि मैंने उसे तुरन्त पूछा की तुम लोग कहां हो? वह कहने लगी मैं तो मुंबई में ही हूं। मैंने उससे कहा मैं तुम लोगों को कितना याद करता हूं और हर दिन यही सोचता हूं कि किसी दिन तो तुम मुझे फोन करोगी और आज जब तुम्हारा फोन आया तो मैं इतना ज्यादा खुश हुआ कि मैं तुम्हें बता नहीं सकता। वहां मुझे कहने लगी क्या तुम्हें अपनी गलती का एहसास हो चुका है। या अब भी कुछ तुम्हारे जीवन में बचा है। मैंने उसे कहा अब मैं बिल्कुल सुधर चुका हूं। मैं ज्यादा किसी के साथ अब संपर्क नहीं रखता मैं सिर्फ तुम लोगों के बारे में सोचता हूं। उसने जब मेरे लड़के से मेरी बात कराई तो उसकी आवाज में काफी भारीपन था और उससे प्रतीत हो रहा था कि वह अब बड़ा हो चुका है। मैंने अपनी पत्नी से कहा कि मैं तुमसे एक बार मिलना चाहता हूं। चाहे उसके बाद तुम मुझे मत मिलना। जब मैंने अपने पत्नी से यह बात कही तो वह कहने लगी ठीक है हम तुम्हारे पास लखनऊ आ जाएंगे।

वह लोग जब मेरे पास लखनऊ आए तो मैं अपनी पत्नी से करीब 20 वर्षों बाद मिल रहा था और इन 20 वर्षों में उसका चेहरा भी काफी बदल चुका था। उसके चेहरे पर हल्की झुरियां भी पढ़ चुकी थी लेकिन अब भी उसके चेहरे की चमक वैसे ही बरकरार थी जैसे कि 20 साल पहले थी। मैं उसे देखते ही गले मिल गया और रोने लगा। जब उसने मुझे मेरे लड़के से मिलाया तो मैं भावुक हो गया। वह मुझसे भी लंबा हो गया था और मैं अपनी लड़की से मिल कर भी बहुत खुश हुआ। मैंने उनके लिए अपने हाथों से चाय बनाई और जब मैंने उनके लिए अपने हाथों से चाय बनाई तो वह लोग खुश हो गये। मैंने उन्हें चाय पिलाई। मेरी पत्नी कहने लगी लगता है अब तुम अकेले रहने के आदी हो चुके हो। मैंने उससे कहा जितने वर्षों तक मां बची हुई थी तब तक तो वही घर का काम करती थी लेकिन जब से उनका देहांत हुआ है उसके बाद से मैं ही घर का काम कर रहा हूं और अब मुझे आदत हो चुकी है। रमा कहने लगी चलो यह तो अच्छी बात है। हम लोग साथ में बैठे हुए थे तो पुरानी बातें निकल आई। रमा मुझसे कहने लगी क्या तुम्हें अपनी गलती का एहसास हो चुका है? मैंने उससे कहा कि अब मेरे जीवन में कुछ भी नहीं बचा। तुम्हें तो पता ही है कि मेरी वजह से तुम लोगों को भी कितनी तकलीफ झेलनी पड़ी। रामा कहने लगी तकलीफ तो होगी लेकिन अब सब कुछ सही हो चुका है। अब दोनों बच्चे भी नौकरी करने लगे हैं  और मैं भी काम करती हूं। वह लोग मेरे पास एक हफ्ते तक रुके। उसके बाद वह लोग वापस जाने के लिए कहने लगे। जब वह जाने वाले थे तो मेरा मन उन्हें छोड़ने का बिल्कुल भी नहीं था। मैंने उनसे कहा कि तुम मेरे पास ही रुक जाओ। मैं तुम लोगो के बिना नहीं रह सकता। मेरा लड़का कहने लगा पापा हम लोग अब नौकरी करते हैं और यहां पर हम लोग क्या करेंगे। अब हमारा घर वहीं पर है और सब कुछ हमने वहीं सेटल कर लिया है। जब उसने यह बात मुझे कहीं तो मेरी आंखों से आंसू छलक गए और मैं बहुत ज्यादा भावुक हो गया। उसके बाद मैंने उन्हें नहीं रोका। वह लोग चले गए लेकिन मैं कई दिनों तक उनकी याद में तड़प रहा था। मैंने अब शराब पीनी भी छोड़ दी थी इसलिए मेरे पास कोई भी सहारा नहीं था। जब रमा ने मुझे फोन किया तो उसने कहा कि तुम अपना ध्यान रखना। यह कहते हुए उसने फोन काट दिया। मैं उन लोगों के लिए बहुत तड़प रहा था। मेरे दिमाग में सिर्फ मेरी गलतियों का एहसास आता लेकिन जब समय निकल गया तो अब उसके बारे में सोचना बिल्कुल ही व्यर्थ है।

मैंने एक दिन रमा को फोन किया और कहा कि मैं तुम्हारे पास आ रहा हूं। मैं जब उनके पास गया तो उन्होंने एक बड़ा घर भी मुंबई में ले लिया था। मैं अपने बच्चों और अपनी पत्नी के साथ रहकर बहुत खुश था। मेरे दिमाग में सिर्फ यही चल रहा था कि मैं अब उनके पास ही रहूंगा। मैं काफी दिनों तक उनके पास ही रहा। मैं घर से कहीं भी बाहर नहीं निकलता था मैं सिर्फ घर पर ही रहता था। एक दिन मैंने अपनी पत्नी रमा को किसी अन्य पुरुष के साथ देख लिया उसके बाद तो जैसे मेरे ऊपर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। मैंने सोचा आज मुझे शराब का सहारा लेना ही पड़ेगा इसीलिए मैं शराब पीने के लिए एक बार में बैठ गया। वहां बैठकर मे अपने जीवन के बारे में सोच रहा था। मेरे दिमाग में यही बात चल रहा था मेरे जीवन में मैंने जो शुरुआती दौर में गलती की उसका नुकसान मुझे अब हो रहा है। मैं शराब पी रहा था मेरे पास एक महिला आकर बैठ गई। वह भी जैसे किसी की सताई हुई महिला थी उसकी उम्र 35 वर्ष के आसपास की थी। उसने भी काफी शराब पी ली थी और वह मुझसे बात करने लगी। जब उसने मुझे अपनी तकलीफ बताई तो मुझे ऐसा लगा जैसे मेरे ऊपर दुखों का पहाड़ टूटा है वैसे ही उसके ऊपर भी काफी दुख है लेकिन वह कुछ ज्यादा ही नशे में हो गई वह अच्छे से चल भी नहीं पा रही थी। मैंने उसे अपना कंधा दिया और कहा आपका घर कहां है। उसने अपने घर का पता मुझे बता दिया मैं उसे उसके घर ले गया उसके घर पर कोई भी नहीं था। जब मैंने उसे बिस्तर पर लेटाया तो उसके स्तनों पर मेरे हाथ लग गए लेकिन मैंने अपने आपको बहुत कंट्रोल किया।

उसने मेरे हाथ को पकड़ते हुए कहा मेरे साथ ही लेट जाओ। उसने मुझे अपने ऊपर लेटा दिया। जब मैं उसके ऊपर लेटा हुआ था तो मेरा लंड भी खड़ा होने लगा और मेरे अंदर से आग पैदा होने लगी। मेरे अंदर इतनी ज्यादा गर्मी पैदा होने लगी मैंने उसके कपड़े उतार दिया। जब मैंने उसके स्तनों पर अपने हाथ को लगाया तो वह भी पूरे मूड में आ गई और उसका नाशा जैसे गायब सा हो गया मैंने उसके स्तनों को चूसना शुरू कर दिया। जब मैंने उसकी योनि के अंदर अपने लंड को डाला तो मेरा लंड उसकी योनि में जाते ही उसक चूत से गर्म पानी बाहर की तरफ निकलने लगा। मुझे बहुत मजा आने लगा मैं उसे तेज गति से धक्के मारता और काफी समय बाद मैंने किसी के साथ सेक्स किया था इसलिए मुझे बहुत मजा आ रहा था। वह भी मेरा पूरा साथ दे रही थी। वह मुझे कहने लगी बेबी ऐसे ही मुझे चोदते रहो तुम्हारे लंड को अपनी चूत में लेने में मुझे बहुत मजा आ रहा है। मैंने उसे कहा मेरा वीर्य नहीं गिर रहा है तुम उल्टे होकर लेट जाओ। मैंने जब उसकी योनि के अंदर लंड को प्रवेश करवाया। जैसे ही मेरा लंड उसकी योनि के अंदर घुसा तो मुझे बहुत मजा आया। मैंने उसे बड़ी तेज गति से चोदना शुरू कर दिया। वह भी अपनी गांड को थोड़ा ऊपर उठाने की कोशिश करती लेकिन मैं इतनी तेज गति से उसकी चूतडो पर प्रहार करता वह अपनी चूतडो को नीचे कर देता। मैंने उसे कसकर अपनी पकड़ा हुआ था। उसकी बड़ी गांड मेंरे लंड से टकरा रही थी और उसकी चूत से जो गर्मी बाहर निकली उसे मैं ज्यादा समय तक नहीं झेल पाया और मेरा मेरे वीर्य पतन हो गया। उसके बाद मैं उसके साथ ही रहने लगा उसका नाम संजना है। संजना ही उसके बाद मेरा ध्यान रखने लगी। उसने ही मुझे संभाला मैंने उससे अपनी सारी बातों को शेयर कर दिया था। मैं उसे कभी तकलीफ नहीं होने देता हम दोनों खुशी खुशी जीवन बिता रहे हैं।

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